१८४६ सालमा काजि दलभन्जन पाण्डेले दिनानाथ उप्रेतीलाई दिएको राहदानी

साइडमा लेखिएको:
साह………. यगा
लाग ग.. र जाँचि
स्वस्तिश्री काजि दलभन्जन पांडेकस्य पत्रम् –
आगे धोविषोला पूर्वपौवा गढीसम्म वस्न्या चौकिदार गैहक यथोचित् उप्रान्त दिनानाथ उप्रेति समेत् बमोजिम
तपसिलका मानिस् जना ११ – ग्रह स्नान गर्न जान्छन् वर्पवर्ण. षोलागरि सरासर जान देउ रो कटोक
नगर-
तपसील
| असामी | जना | वर्ष | वर्ण |
| दिनानाथ उप्रेती | १ | ५८ | गोरो |
| लक्षिमि ब्राम्हनी | १ | ५२ | सांवलो |
| गजाधर उप्रेती | १ | २२ | गोरो |
| राजाराम उप्रेती | १ | ६१ | रातो |
| तारादास थपलिया | १ | ४८ | गोरो |
| बछलादेवी ब्राम्हनी | १ | ३३ | गोरो |
| पशुपति पन्याल् | १ | ५० | रातो |
| इछा राम पांडे | १ | ३८ | कालो |
| भरिया जना | ३ |
इति सम्वत् १८९६ साल मिति माघ वदि २ रोज २ शुभं –
सम्बन्धित खवर
- समितिले आयाेजना गरेको पशुपतिनाथ, बागमती गंगा आरती
- महिला बिभागकाे पहिलाे बैठक
- हरितालिका तिजको अवसरमा पशुपतिनाथ परिसरमा सञ्चालित सेवा कक्ष
- अन्तरसामाजिक सद्भाव र सहकार्यकाे लागि हातेमालाे: पनाैती-नमाेबुद्ध शान्ति पदयात्रा
- बासकाे लागि बहस: भवन ब्यवस्थापनमा सहभागिताकाे अनुराेध!
- पण्डित भरत उप्रेतीले किनेको जग्गाको ताम्रपत्रको नक्कल
